धूप बारिश से मिलकर गर रचाती साज़िशें तो आँधियों को बुलाने में ही अक्लमंदी है धूप बारिश से मिलकर गर रचाती साज़िशें तो आँधियों को बुलाने में ही अक्लमंदी है
तूफ़ान जब आते हैं , सिर्फ तबाही मचाते हैं. तूफ़ान जब आते हैं , सिर्फ तबाही मचाते हैं.
प्यार का क्या है! प्यार का क्या है!
और तुम... तुम मुझमें रहकर भी मुझसे जुदा हो। और तुम... तुम मुझमें रहकर भी मुझसे जुदा हो।
बन कर फल कभी थोड़े कच्चे तो कभी थोड़े पक्के, लटकते अधटूटी टहनियों से दिखावी रिश्ते। बन कर फल कभी थोड़े कच्चे तो कभी थोड़े पक्के, लटकते अधटूटी टहनियों से दिखा...
कभी छाँव तो कभी धूप ज़िन्दगी बदले कितने ही रूप ज़िन्दगी, कभी कौवे की कर्कश वाणी सी क कभी छाँव तो कभी धूप ज़िन्दगी बदले कितने ही रूप ज़िन्दगी, कभी कौवे की कर्कश ...